Wednesday, August 31, 2011

बातों के धागे



जब में इस ब्लॉग को बनाने की सोच रहा था तो सबसे बड़ी दिक्कत इसी बात की थी की में इस ब्लॉग को क्या नाम दूं, काफी नामों के बारें में सोचने के बाद भी एसा नाम नहीं मिला जो इस ब्लॉग को और इसके होने की वजह को दर्शाए फिर अचानक दिमाग में एक नाम कौंधा
बातों के धागे
हाँ ये ऐक ऐसा नाम है जो इस ब्लॉग के अस्तित्व का सही साबित करता है.बातें ऐक जरिया/माध्यम होती है जो इंसानी ज़ज्बातों के मोतियों लफ्जों/शब्दों को ऐक साथ पिरोने के काम आती है,बातों के धागे लोगो को करीब भी लातें है,और करीब आने से रोकते भी है,अगर इसके सिरे खुले हों तो ये सारी दुनिया सारा आकाश होती है,और सिरे बंधे हो तो ऐक आकर रूप में में होकर सपनो और सोच को साकार करते है ।
मुझे भी अपने मोतियों को बाधने के लिए बातों के धागे की जरूरत जो शायद इस ब्लॉग से पूरी ही जाये .
बस इतना ही
मयंक मिश्रा

में और ये ब्लॉग

मैं भारत की धार्मिक राजधानी वाराणसी/काशी का रहने वाला हूँ ,पिछले कुछ सालो से मैं अपने पढाई और फिर नौकरी के सिलसिले में वाराणसी और अपने परिवार से दूर रह रहा हूँ,
वेसे तो मेरे कुछ और ब्लॉग हैं पर वो सब मेरे कार्यक्षेत्र अथवा पढाई से जुड़े हुए है
मैं कई दिनों से एक ब्लॉग लिखने की सोच रहा था जिसकी भाषा और पोस्ट मेरे अपने विचारों और अनुभवों को सहेज सके . ये ब्लॉग हमारी मात्रभाषा हिंदी मैं है ताकि भावों की अभिव्यक्ति सही और संतुलित तरीके से हो सके.बस इतना ही
मयंक मिश्रा