
कल वासू का जन्मदिन था घर मैं कीर्तन रखा गया था , सुबह से ही घर की औरतें काम मैं व्यस्त थी कई काम जो करने थे आँगन की सफाई,प्रसाद बनाना कीर्तन मैं आने वाली औरतों के लिए जलपान बनाना और घर की साज-सज्जा
फिर शाम को जनमदिन का केक कटा ....केक बड़ा भी था और सुस्वादु भी पर उससे पेट नही भरा जा सकता
फिर बडो ने कहा की :-तुम सभी बाहर खाना खा आओ
घर की महिला संगठन मैं खुशी की लहर दौड़ गई ...कुछ बाहर जा कर जी हल्का करने की और कुछ रात के खाने के जहमत से बचने की
घर के सभी सदस्य रात्रि-भोज के लिए बाहर गये थे.मुझे खाना नही था फिर भी मैं उनके साथ गया
ना खाने का एक फ़ायदा ये हुआ की जॅहा सभी खाने मैं मस्त थे में वहाँ आए लोगो की दुनिया मैं झाँक रहा था
वहाँ कोने की टेबल पर एक "हम दो हमारे दो" पर आधारित परिवार बैठा था(उन लोगो को एक लड़का और एक लड़की थी),दोनो बच्चो मैं से लड़का हाथ मैं खिलोने वाले मोबाइल को लगातार बजाए जा रहा था जिससे बरबस ध्यान वहाँ खिच जा रहा था,कुछेक मिनट मैं उन्होने खाना ख़त्म किया और चल दिए...दरवाजे पर पहुचने के बाद बच्चो ने सौफ़ के लिए कहा:- पापा मीठी सौफ़ खानी है ...पिताजी ने भी पूरे अधिकार से काउंटर पर रखे प्लेट की तरफ़ इशारा कर दिया
लड़की दौड़ते हुए आई और थोड़ी सौफ़ खाई और अपने दोनो मुठ्ठी मैं सौफ़ भरा और चल दी,छोटा लड़का भी आया उसने भी थोड़ा सा खाया एक मुठ्ठी मैं भरा ....दूसरे हाथ के खिलोने को टेबल पर रखा उससे भी सौफ़ को उठाया
फिर खिलोने को उठाने की नाकाम कोशिश की,उसका चेहरा रुआंसा हो गया था .....फिर खीजते हुए उसने पहले हाथ की सौफ़ को वापस प्लेट मैं पलट कर खिलोने को उठाया और चला गया
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